जन्माष्टमी पूजा को सही तरीके से करने के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन करें:

तैयारी और सजावट:

पूजा के लिए साफ-सफाई करें और पूजा स्थल को सजाएं।
श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र को सजाने के लिए एक विशेष स्थान तैयार करें।
उपासना का समय:

जन्माष्टमी का दिन श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, इसलिए उपासना रात को करें।
उपवास और निषेध:

जन्माष्टमी के दिन उपवास करें और संध्या के समय उपवास का निवारण करें।
पूजा की सामग्री:

पूजा के लिए श्रीकृष्ण की मूर्ति, फूल, बिल्वपत्र, तुलसी पत्ते, दीपक, धूप, अक्षत (चावल), नारियल, पूआ, धनिया, रंगों की गुलाल, और फल आदि की आवश्यकता होती है।
पूजा का विधान:

श्रीकृष्ण की मूर्ति को स्नान कराएं, फिर सुन्दर वस्त्र पहनाएं और आभूषण लगाएं।
श्रीकृष्ण की मूर्ति को पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, और पुष्पांजलि के साथ पूजें।
भगवान के भजन गाएं और व्रत कथा सुनें।
रात्रि जागरण:

कई स्थानों पर जन्माष्टमी की रात्रि जागरण का आयोजन किया जाता है, जिसमें भगवान के गीत और नृत्य का आनंद लेते हैं।
व्रत खोलना:

जन्माष्टमी की रात को व्रत खोलने के लिए पूजा करें और प्रसाद बाँटें।
दान करना:

गरीबों और बेहद जरूरतमंदों को दान करने का योग्य विचार करें, जैसे अन्न, वस्त्र, और धन।
व्रत विचार:

व्रत के दिन नकुल-सहदेव की मूर्तियों की भी पूजा करें, क्योंकि वे भी श्रीकृष्ण के यादगार हैं।
भगवद गीता का पाठ:

जन्माष्टमी के दिन भगवद गीता का पाठ करने का प्रयास करें, यह भगवान के वचनों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आराधना और भजन:

जन्माष्टमी के दिन भगवान की आराधना करें और उनके भजन गाएं, जो उनकी भक्ति में रमणीय होते हैं।
संगति और सेवा:

इस दिन भक्तियों के साथ संगति करें और ज्ञान विचार का समर्थन कर